एक गुरु ऐसा भी, 94 साल की उम्र में भी युवाओं सा जज्बा

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  • आज भी समाज और देश के बारे में सोचते हैं गुरुजी विद्यादत्त रतूड़ी

20 फरवरी 2023। उस दिन डीडी न्यूज में था तो गुरुजी विद्यादत्त रतूड़ी का फोन आया कि तुम्हें लम्बगांव आना है। वहां 22 फरवरी को कस्तूरबा गांधी जयंती पर उन्हें जनश्री सम्मान दिया जा रहा है। गुरुजी कभी ऋषिकेश तो कभी देहरादून रहते हैं। उस दिन उन्होंने मुझे अक्टूबर माह में शांति निकेतन हरिद्वार के साथ मिलकर संस्कारों और जीवन मूल्यों पर आधारित इंटरनेशनल सेमिनार की रूपरेखा भी बतायी और कहा कि इसमें मुझे अहम जिम्मेदारी निभानी है। मैं दंग था कि 93 साल का एक मनुष्य अपने स्वास्थ्य की चिन्ता छोड़ देश-दुनिया की सोच रहा है। गजब की सोच और कर्मठता है इस मनुष्य में।
बता दूं कि गुरुजी विद्यादत्त रतूड़ी लम्बगांव के प्रिंसीपल रहे। उन्होंने न केवल गुरु-शिष्य परम्परा को जीवित रखा बल्कि टिहरी में अनेक आंदोलनों का नेतृत्व भी किया। इसमें बलि प्रथा का विरोध, शराब विरोधी आंदोलन, वृक्ष बचाओ अभियान, महिला समूहों का गठन समेत कई आंदोलन शामिल हैं। उन्होंने टिहरी में सबसे पहले 1955-56 में रामलीला शुरू करने का बीड़ा भी उठाया। उस दौर में टिहरी में रामलीला नहीं होती थी कि एक राज्य में दूसरे राजा का राज्यतिलक कैसे हो? उन्होंने वहां की जनता की मानसिकता को बदला और रामलीला शुरू की। उन्होंने लम्बगांव स्कूल को नया आयाम दिया। कस्तूरबा गांधी के जन्म दिन पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। उन्हें शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार भी मिला।
उन्होंने उत्तराखंड की राजनीति में भी कदम रखा। 1992 में यूकेडी के टिकट पर टिहरी से चुनाव लड़ा। थोड़े से अंतर से चुनाव हार गये। यूकेडी के संरक्षक भी रहे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया। गांव-गांव घूमे, लेकिन विडम्बना देखिए कि जब राज्य बना तो उन्हें राज्य आंदोलनकारी का दर्जा ही नहीं मिला। यूकेडी के दुर्दिन इसलिए हैं कि उसने अच्छे लोगों की कद्र नहीं की। तो 1997 में यूकेडी छोड़ दी। इसके बाद शिक्षा के उत्थान में जुट गये। 2010 में उन्होंने हरिद्वार महाकुंभ में प्रदेश की देवडोलियों के गंगा स्नान की नई परम्परा शुरू की। 1200 से भी अधिक देवडोलियों ने हरिद्वार महाकुंभ में स्नान किया। 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद भी वह आपदा पीड़ितों की मदद के लिए अभियान चलाते रहे। मृतकों की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ भी किया।
वह आज जीवन के 94वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उनकी सोच आज भी जनहित की है। जीने और अच्छा कर्म करने की ललक लिए हुए हैं। इनका जीवन आज के शिक्षकों और नेताओं के लिए प्रेरक है। गुरुजी के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के साथ उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामना।
[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

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