गुजर रही है जिंदगी ऐसे मुकाम से, अपने भी दूर हो जाते हैं जरा से जुखाम से

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कोरोना पर नन्हें बच्चे जगा रहे जागरूकता का अलख, अपने हाथों से बनाकर गलियों में लगा रहे पोस्टर

ऊना, 24 मई। गुजर रही है जिंदगी ऐसे मुकाम से, अपने भी दूर हो जाते हैं जरा से जुखाम से। ऊना जिले की ग्राम पंचायत अंबोआ के वार्ड नंबर दो में अगर आप जाएं, तो ऐसे ही कुछ जागरुकता पोस्टर आपका ध्यान जरूर खींचेंगे। इन पोस्टर के माध्यम से कोरोना से बचने के उपायों से लेकर प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों की अनुपालना करनी की सीख दी गई है और इन्हें बनाने वाले 7 से 11 वर्ष की आयु के बच्चे हैं।

गांव की गलियों में लगे यह पोस्टर नन्हें-मुन्ने बच्चों ने स्वयं तैयार किए हैं। अंबोआ निवासी ग्यारह वर्षीय दिव्यांश परमार, 8 साल की इशिता और 7 साल के आर्या ने अपने हाथों से यह जागरूकता पोस्टर लगाए हैं। इन नन्हें बच्चों की मदद 18 वर्षीय मानसी परमार व 22 साल की काजल ने भी की है। पोस्टर बनाने का काम से लेकर इन्हें गलियों में तक का कार्य बच्चों ने खुद ही किया है।

उपायुक्त राघव शर्मा ने भी इन बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा है कि बच्चों द्वारा बनाए जा रहे जागरूकता पोस्टर मेरे ध्यान में लाए गए हैं। कोरोना पर लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन जहां अपने स्तर पर प्रयासरत है, वहीं नन्हें बच्चे भी इस काम में पीछे नहीं हैं। बच्चे पूरी शिद्दत के साथ कोरोना को हराने के लिए काम कर रहे हैं और अगर समाज का हर व्यक्ति अपना दायित्व इसी प्रकार समझे और प्रशासन को मदद दे, तो कोरोना पर काबू पाने में आसानी होगी। डीसी राघव शर्मा ने सभी से मास्क लगाने व सामाजिक दूरी के नियम का पालन करने के साथ-साथ कोविड वैक्सीन लगाने की अपील की है।

बच्चों द्वारा बनाए गए कुछ पोस्टरों में मास्क लगाने, सामाजिक दूरी रखने व कोरोना से बचने के लिए हाथ न मिलाने जैसे कोविड अनुरूप व्यवहार की जानकारी दी गई है। जबकि कुछ पोस्टर में कविता के रूप में जागरूकता फैलाई जा रही है। आने जाने हर गांववासी की एक नजर इन पोस्टरों पर अवश्य पड़ती है, जो उन्हें दिशा-निर्देशों को मानने के लिए प्रेरित करती हैं। गांव के निवासी भी बच्चों के इस प्रयास की प्रशंसा कर रहे हैं।

ग्राम पंचायत अंबोआ की प्रधान रीमा देवी कहती हैं कि बच्चों की यह पहल सराहनीय है। इतनी छोटी उम्र में बच्चे बड़ी मेहनत कर लोगों को जागरुक करने का कार्य कर रहे हैं। पंचायतों भी अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही हैं, लेकिन इन बच्चों की समाज सेवा की भावना हम सबके लिए मिसाल है।

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