कवीन्द्र चला रहे गांव बसाओ अभियान

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  • चौबट्टाखाल स्थित अपने इसोटी गांव की तस्वीर और तकदीर बदली
  • ग्रामीणों को कर रहे बागवानी और स्वरोजगार के लिए प्रेरित

कवींद्र इस्टवाल युवा नेता हैं। कांग्रेस के प्रदेश सचिव हैं। इस नेता ने बदलाव की बयार अपने गांव से लाने का कार्य किया है। हरेला पर्व पर जहां नेताओं ने देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी में एक नाममात्र को पौधा रोप कर हरेला मनाने की रस्म पूरी की। वहीं कवींद्र ने अपने गांव में 200 फलों के पौधे लगा कर स्मृति वाटिका बना दी। उन्होंने अपने गांव समेत आसपास के ग्रामीणों को भी 200 से अधिक फलों नींबू, माल्टा समेत अनेक फलों के पौधे दिए।
कवीन्द्र की यह कवायद अनुकरणीय है। कवीन्द्र विगत वर्ष कोरोना काल से ही चौबट्टाखाल इलाके में ग्रामीणों को कोरोना के खिलाफ जागरूक करने का काम कर रहा है। जरूरतमंदों को मास्क, सेनेटाइजर, दवाएं और राशन भी उपलब्ध करा रहे हैं। अपने गांव इसोटी की प्राइमरी स्कूल का कायाकल्प भी किया। स्कूल को उन्होंने कंप्यूटर, डेस्क और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायी हैं। इलाके के कई युवकों को उन्होंने स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और उन्हें प्रोत्साहन दिया। गांव में उन्होंने एक भव्य मंदिर का निर्माण भी किया है। उनके गांव तक सड़क नहीं थी तो कवीन्द्र ने दो किलोमीटर सड़क बनायी।
कवीन्द्र ने राजनीतिक शुचिता को महत्व दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कवीन्द्र चौबट्टाखाल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार थे। उन्हें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने अनेकों लालच दिये लेकिन वो नहीं डिगे। राजनीति में छोटी-सी अवधि में इस युवा नेता ने धरातल पर काम कर बड़ी पकड़ बनायी है। कवीन्द्र ने समाजसेवा का प्रण लिया है। कवीन्द्र का कहना है कि पहाड़ों को बसाना है तो हमें अपने गांव से बदलाव की बयार लानी होगी। जब तक हम अपनी माटी और थाती के प्रति ईमानदार नहीं होंगे तो पहाड़ आबाद नहीं होंगे। कवीन्द्र गांव बसाओ अभियान चला रहे हैं और लोगों को बागवानी, जैविक खेती और स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

रणबांकुरों का गांव

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