अभिप्रेरण (मोटिवेशन)

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लक्ष्य निर्धारण के पश्चात सफलता की दिशा में अगला कदम होता है अभिप्रेरण अर्थात मोटिवेशन। लक्ष्य का निर्धारण होने तथा उसका स्पष्ट तथा सार्थक चित्र मस्तिष्क में स्थापित करने के पश्चात व्यक्ति को उस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में स्वयं को मोटिवेट करते रहना चाहिए। मोटिवेशन निम्न तीन कारकों से मिलकर बना है…
1. मोटिवेशन का प्रारंभ किसी लक्ष्य के प्रति हमारी इच्छा, आवश्यकता तथा हमारे दृष्टिकोण से होता है।
2. इसके लिए सदैव कुछ नया करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। नए अवसर प्राप्त करने के लिए जोखिम उठाने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
3. मोटिवशन के अंतर्गत व्यक्ति को अपनी विफलता के उपरांत स्वयं को पुनः तैयार करके श्रेष्ठ अवसर प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। सफलता के मार्ग में बाधाएं आती हैं, पर उनसे कभी भी घबराना नहीं चाहिए। उनसे पार पाने पाने का प्रयास करना चाहिए। यदि आप बाधाओं को हटाने में सफल नहीं हो पाते तो पुनः दोगुनी शक्ति से उन बाधाओं से पार पाने का प्रयास करना चाहिए।
वह व्यक्ति जिसके पास एक निर्धारित लक्ष्य होता है। वह अपनी जीवन शैली तथा लक्ष्य को नियंत्रित कर सकता है। ऐसे व्यक्ति जिनके पास कोई लक्ष्य नहीं होता उनकी जीवनशैली और लक्ष्य को अन्य व्यक्ति निर्धारित करते हैं। जो व्यक्ति विशेष अन्य लोगों पर निर्भर रहते हैं वे कभी सफल नहीं होते। जो स्वयं पर विश्वास रखते है, सफलता उनकी मुट्ठी में होती है। अब बात करते हैं मोटिवेशन के नियमों की जिनका पालन करके ही सफलता को प्राप्त किया जा सकता है।
मोटिवेशन के लिए सबसे आवश्यक है, जो भी करो पूरा करके ही दम लो। कुछ लोग कार्य तो प्रारंभ कर देते हैं परंतु उसमें में आने वाली बाधाओं से घबराकर, उस छोड़ देते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। कार्य प्रारंभ करने से पूर्व उस कार्य से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर करें साथ ही अपनी क्षमता एवं योग्यता का आंकलन करने पर ही उस कार्य को शुरू करें। आधा छोड़ा हुआ कार्य किसी अर्थ का नहीं होता इससे धन और समय दोनों की ही हानि होती है।
मोटिवेशन का दूसरा नियम है, ऐसे लोगों से मित्रता करो जो आपको प्रोत्साहित करें। हतोत्साहित करने वालों का साथ छोड़ना ही उपयुक्त होता है। हतोत्साहित करने वाले तथा नकारात्मक सोचने वाले न तो स्वयं सफल होते हैं, न अपने मित्रों को ही सफल होने देते।
मोटिवेशन का तीसरा नियम है स्वयं सीखने के सिद्धांत में विश्वास करना। किसी पर निर्भर होने की अपेक्षा स्वयं कुछ नया कर दिखाने की ललक ही व्यक्ति को सफलता के दरवाजे पर लेकर जा सकती है। विशेष रूप से विधार्थियों को जहां तक संभव हो स्वयं ही समस्या का समाधान करने का प्रयास करना चाहिए। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
मोटिवेशन का चौथा सिद्धांत है अपने प्रकृति प्रदत्त प्रतिभा को पहचान कर वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो। उदाहरण के लिए यदि आपकी क्रिकेट में रुचि है तो क्रिकेट में ही स्वयं को निपुण बनाने का प्रयास करें।
मोटिवेशन का पांचवां नियम है, उस विषय में जानकारी बढ़ाने का प्रयास करें जो आपको प्रेरणा देता है। जैसे आपको किसी खिलाड़ी या फिर राजनेताओं की जीवनी प्रभावित करती है तो आप उन्हें पढ़ें तथा उनसे प्रेरणा लेने का प्रयास करें।

बनिए कर्मयोगी, जिंदगी मुस्कुराएगी

मोटिवेशन का अंतिम परंतु सबसे निर्णायक नियम है कि जोखिम उठाए। कुछ लोगों को जोखिम उठाने का तर्क अवश्य ही कुछ अटपटा लगेगा परंतु वाणिज्य शास्त्र का एक नियम है कि ‘जितना अधिक जोखिम उतना अधिक लाभ।’ विफलता से कभी मत घबराओ। विफलता के पश्चात तुरंत दोगुनी ऊर्जा के साथ प्रयास करो, सफलता आवश्य ही मिलेगी। आखिर कब तक विफलता आपको हराएगी, एक न एक दिन उसको हारना ही होगा।
यहां थामस एडिसन का उदाहरण दिया जा सकता है। उन्होंने बल्ब का आविष्कार करने के लिए लगभग दस हजार बार प्रयास किए। प्रत्येक बार विफल होने के पश्चात वह पुनः प्रयास में लग जाते और अंततः एक दिन वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुए। दस हजार बार विफल होने पर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। वह भी ठानकर बैठे थे, उन्हें विफलता को मात देना ही है। अंततोगत्वा वह विफलता पर विजय प्राप्त करने में सफल हुए। थामस एडिसन के उन हजारों प्रयासों के परिणामस्वरूप मानव जाति के जीवन में बल्ब का प्रकाश संभव हुआ। आज मानव जाति एडिसन के इस अविष्कार के लिए उसके प्रति कृतज्ञ है।
ऐसा कुछ आप भी कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यकता है तो बस विफलता से हार न मानने की। एक बार न सही तो दो बार और दो-बार न सही तो तीसरी…चौथी…पांचवीं….छठीं बार आखिर कब तक। कभी तो सफलता मिलेगी ही। इस प्रकार की भावना ही आपको मोटिवेट कर सकती है।
जीवन में संघर्ष से प्रेम करो। संघर्ष करना कभी न छोड़ो। देखना आपका जीवन अवश्य ही बदलेगा। अपनी नाकामयाबी पर आंसू बहाने की अपेक्षा थामस एडिसन की तरह निरंतर संघर्ष करना सीखना ही सफलता है। प्रत्येक विफलता आपको कुछ सीखने का अवसर प्रदान करेगी। यह मत सोचो की आपके प्रयास व्यर्थ गए। आपके प्रयास अवश्य ही रंग लाएंगे। विफलता के पश्चात स्वयं को मानसिक रूप से पुनः तैयार करें। मानसिक रूप से तैयार करने के लिए मोटिवेशन सर्वोत्तम युक्ति है। अपने को मानसिक रूप से प्रेरित करे ‘बीती ताहि बिसार के आगे की सुध ले’। जो हो गया सो हो गया अब आगे मैं क्या करूं। इस विचार से सोचें। अक्सर लोगों का आधा जीवन भूतकाल में सोचने में ही बीत जाता है कि मैं ऐसा कर देता तो ऐसा हो जाता। भूतकाल की नाकामी तथा भविष्य के प्रति चिंतित होने की अपेक्षा वर्तमान में जीना सीखें। क्यों अपने जीवन की मानसिक ऊर्जा को भूतकाल की नाकामी और भविष्यकाल की चिंता में लगाकर व्यर्थ गंवाते हो। आज के लिए सोचो, वर्तमान में जीना सीखें अपनी समुचित मानसिक ऊर्जा का प्रयोग वर्तमान काल के विकास पर लगाओ आपका भविष्य स्वयं की सुधर जाएगा। स्वयं को सदैव वर्तमान के लिए मोटिवेट करो कि आप वर्तमान में कितना श्रेष्ठ कर सकते हो।

‘ज़िन्दगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है’

किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए तैयार रहो। परिवर्तन से यद्यपि अस्थिरता आती है परंतु इससे सीखने को मिलता है। परिवर्तन से जीवन मंे कुछ नया घटित होता है। यह हमें नए वातावरण में ढालने के लिए विवश करता है और यह विवशता हमें संघर्ष करने के लिए प्रेरित करती है। यही संघर्ष हमें मोटिवेट करता है। मोटिवेशन हमारी सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
कई बार आपको अपने कार्य के लिए आलोचना सुननी पड़ती है। आलोचना आपको अवसर प्रदान करती है, अपनी कार्यक्षमता में सुधार लाने का। गलती करना मानवीय स्वभाव है। सफलता उन्हीं को मिलती है, जो गलतियों से सबक सीखते हैं। आलोचना को नजर-अंदाज करते हुए अपने कार्य को सिद्ध करने का प्रयास करें। गलतियों को स्वयं पर हावी न होने दें। काम को सीखने और उस पर नियंत्रण करने का प्रयास करें।

राकेश कुमार शर्मा

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