महंगी हो गयी मोदी जी की गुफा, भगा दिये साधु संत

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  • गाय-बछिया और बच्चों के साथ करेंगे देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन
  • एक मस्जिद या गिरिजाघर को कब्जे में लेकर दिखाए सरकार: विनोद शुक्ला

क्या आपको याद है कि 18 मई 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ की जिस रुद्र गुफा में रात बितायी थी, वहां कितना विकास हुआ है। देवस्थानम बोर्ड ने यहां विकास के नाम पर इतना ही किया कि रुद्र गुफा में शौचालय बना दिया और गुफा में सोलर लाइट लगा दी। इस गुफा का किराया अब एक दिन का 2400 रुपये कर दिया गया है। यह कहना है केदारनाथ तीर्थपुरोहितों के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का। उनके अनुसार गुफा से साधु-संतों को भगा दिया गया है।
बोर्ड विकास के नाम पर तोड़फोड कर रहा है। घाटों को तोड़ा जा रहा है। मंदिर के पीछे सुंरग बना दी गयी है और पिंडदान पर रोक लगाने की तैयारी है। विनोद शुक्ला का कहना है कि तीर्थ पुरोहितों को मंदिर में जाने से रोका जा रहा है। वह सवाल उठाते हैं कि आखिर सरकार की नजरें चारधामों के मंदिरों पर क्यों है? वह तर्क देते हैं कि सरकार चार मंदिरों को ले रही हैं, क्या सरकार किसी मजिस्द या गिरिजाघर को अपने कब्जे में ले सकती है?

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उनके अनुसार यदि सरकार को विकास करना है तो केदारनाथ धाम को सड़क मार्ग से जोड़े। देवदर्शनी में कॉटेज बनाएं लेकिन तीर्थ पुरोहितों की भूमि पर छेड़छाड़ क्यों? हक-हकूकों को क्यों लिया जा रहा है? घाट तोड़ दिया, भवन बनाएं और तोड़ दिये। मंदिर का मुख्य घंटा ही नहीं लगाया। यह विकास हो रहा है या विनाश। हरीश सरकार ने 30 फुट और फिर 60 फीट जगह ले ली। लेकिन अब दुकानों को पीछे फेंक दिया। यहां तीर्थाटन होना चाहिए लेकिन इसे पर्यटन में बदला जा रहा है।
आनलाइन प्रसाद बेचना सही नहीं है। पुजारी पूजा कर जजमान को प्रसाद देता था लेकिन ये आनलाइन प्रसाद दे रहे हैं। स्थानीय लोगों से रोजगार छीनने का प्रयास किया जा रहा है। टोकन या लॉटरी व्यवस्था सही नहीं हैं। सरकार युवाओं को रोजगार दे नहीं रही और केदारनाथ धाम में स्थानीय युवाओं को जो कुछ दिनेां का रोजगार मिलता है उसे भी छीना जा रहा हैं। तीर्थपुरोहित विधि-विधान से जाकर पूजा के लिए ब्रहमकमल लाते थे लेकिन वाटिका बनने के बाद ब्रहमकमल कोई भी ला सकता है। सरकार ने उन्हें केदारपुरी में जमीनों से बेदखल कर दिया है और भवन नहीं बनाए गये हैं।
तीर्थ पुरोहित संगठन के अध्यक्ष पं. विनोद शुक्ला का कहना है कि सरकार ने तीर्थपुरोहितों से बोर्ड को लेकर एक भी बार बात नहीं की। सतपाल महाराज ने कभी उनसे बात नहीं की। न ही रविनाथ रमन ने ही की। तीर्थ पुरोहित की सुनवाई नहीं हो रही है और बोर्ड में अडानी-अंबानी जैसे पूंजीपतियों को सदस्य बना दिया है। पूरी तरह से धामों को कब्जाने की तैयारी हैं। देवस्थानम बोर्ड को तुरंत भंग किया जाना चाहिए। तीरथ ने सीएम बनने के बाद इस पर पुनर्विचार करने की बात कही लेकिन अब सतपाल महाराज कह रहे हैं कि पुनर्विचार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने बोर्ड भंग नहीं किया तो चारों धामों में बड़ा आंदालन होगा।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

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