तत्काल रेल टिकट जैसा हो गया वैक्सीनेशन स्लॉट

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– एक मिनट में ही फुल हो जा रहा स्लॉट
– आओ, खेलें कोविन एप पर ओटीपी-ओटीपी

मैं एक बुरा पत्रकार हूं। अपनी ही बिरादरी को कोसने का काम करता हूं। अब देखिए, देहरादून के प्रेस क्लब में क्या हुआ? दो दिन वैक्सीन के लिए तय थे। भाई लोग अपने परिवार के साथ अपने रिश्तेदारों, सास, ससुर, साला-साली लेकर वैक्सीन लगाने चले गए। नतीजा, जिनको वैक्सीन लगनी थी, यानी फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर पत्रकारों को, तो वो वंचित हो गए। बाद में टोकन बांटे गए लेकिन वैक्सीन अब तक नहीं आई। हेल्थ डिपार्टमेंट तक शिकायत चली गई। नुकसान पत्रकारों और उनके परिवारों का ही हुआ।

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अब भारतीय सिस्टम गजब का है। यहां कोई सिस्टम बना नहीं कि हैक हो जाता है। वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट बुक करना चंद्रमा पर जमीन खरीदने जैसा कठिन और रेल यात्रा के लिए तत्काल में बुकिंग कराने जैसा हो गया है। चार बजे से दस मिनट पहले स्लॉट के लिए इंतजार कीजिए। एक मिनट के लिए स्लॉट बुकिंग होती है, लेकिन ओटीपी है कि नीरव मोदी या विजय माल्या की तरह आता ही नहीं। तीन मिनट बाद यदि ओटीपी आया भी तो पता चलता है कि स्लॉट तो बुक हो गए। आप करते रहिए शेड्यूल को रिफ्रेस। दावा कर रहा हूं कि इसमें भी कोई घपला निकलेगा।

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सरकार को केवल वाहवाही लूटनी थी तो 18 प्लस को वैक्सीनेशन की घोषणा कर दी। जबकि वास्तविकता यह है कि पहले सीनियर सिटीजंस, गंभीर बीमारियों वाले और 45 प्लस का टीकाकरण करना था। उत्तराखंड में अब तक सात लाख लोगों का भी टीकाकरण नहीं हो पाया है, जबकि हर्ड इम्युनिटी के लिए भी 65 लाख लोगों का टीकाकरण यानी दोनों डोज देनी होगी। इस आधार पर एक साल तक भी प्रदेश में टीकाकरण नहीं हो पाएगा। तब तक आप लगे रहें स्लॉट बुकिंग में ओटीपी-ओटीपी खेलें। जब स्लॉट बुकिंग के लिए भी रामभरोसे रहना होगा तो क्या बुरा है कि वैक्सीन लगे, न लगे।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

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