डीयू में ओबीसी के खाली पदों को भरा जाएः डॉ. हंसराज सुमन

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नई दिल्ली, 29 जून। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों को 19 सितंबर 2019 को एक सर्कुलर भेजकर ओबीसी एक्सपेंशन के सेकेंड ट्रांच (दूसरी किस्त) के बकाया शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति करने के आदेश दिए थे। ओबीसी कोटे की शिक्षक पदों की दूसरी किस्त जारी किए जाने पर कुछ कॉलेजों ने इन पदों पर एडहॉक टीचर्स की नियुक्ति कर ली, लेकिन बहुत से कॉलेजों ने इन पदों पर आज तक नियुक्ति नहीं की और न ही इन पदों को रोस्टर में शामिल कर विश्वविद्यालय प्रशासन से पास कराकर पदों को विज्ञापित किया। आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने पिछले दो साल से कॉलेजों द्वारा ओबीसी आरक्षण के सेकेंड ट्रांच के पदों को ना भरने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। इन पदों पर नियुक्ति न किए जाने की शिकायत उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन डॉ. भगवान लाल सहनी से उनके निवास पर मिलकर की है। डीयू में ओबीसी आरक्षण की स्थिति पर उनसे लंबी बातचीत हुई। उन्होंने कॉलेज वाइज आंकड़े मांगें है। इस संदर्भ में डीटीए ने यूजीसी द्वारा जारी सेकेंड ट्रांच के पदों की लिस्ट आयोग को दी है। इस पर जल्द कार्यवाही की मांग की।
डीटीए प्रभारी और विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को ओबीसी आरक्षण और उसके एक्सपेंशन की बकाया दूसरी किस्त के अंतर्गत शिक्षण पदों का सर्कुलर 19 सितंबर 2019 को ओबीसी कोटे के सेकेंड ट्रांच के पद आबंटित किए थे, जिनको दो साल बीतने को है मगर कुछ कॉलेजों ने ओबीसी आरक्षण को अपने रोस्टर में जोड़ा नहीं है। उन्होंने बताया है कि बहुत से कॉलेजों की स्टाफ एसोसिएशन व स्टाफ काउंसिल ने इन पदों को रोस्टर में जोड़े जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया फिर भी रोस्टर में इन पदों को जोड़ा नहीं गया और ना ही इन पदों पर ओबीसी कोटे के शिक्षकों की नियुक्ति की। उन्होंने बताया है कि कॉलेज प्रिंसिपल ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर तेजी से काम कर रहे हैं, मगर ओबीसी कोटे के पदों को भरने व रोस्टर में शामिल नहीं कर रहे हैं।
डॉ. सुमन ने यह भी बताया कि ओबीसी कोटे के पदों को रोस्टर में जोड़े जाने से लंबे समय से विभिन्न कॉलेजों में पढ़ा रहे एडहॉक टीचर्स जो किसी भी कारणवश कॉलेजों के आरक्षण रोस्टर में बदलाव के कारण बाहर नहीं हो पाएंगे, उन सभी एडहॉक टीचर्स को ओबीसी रोस्टर के अंतर्गत शामिल (एकमोडेट) किया जा सकता है। इसके अलावा बहुत से एससी/एसटी/ओबीसी और अनारक्षित वर्गों के उम्मीदवारों के लिए नए पदों के रास्ते खोले जा सकते हैं और एससी/एसटी/ओबीसी कोटे के उम्मीदवारों के साथ न्याय किया जा सकता है। उनका कहना है कि ओबीसी कोटे के इन पदों के भरे जाने से सभी वर्गों के उम्मीदवारों को उनका हक तभी मिल सकता है जब कॉलेज प्रिंसिपल इन पदों को आरक्षण रोस्टर में शामिल कर इन पदों पर एडहॉक/स्थायी नियुक्ति करें।
डॉ. सुमन का कहना है कि दूसरी किस्त के अंतर्गत दिए गए ओबीसी कोटे के शिक्षकों के पद पूरी तरह से स्थायी नियुक्ति होने तक इन्हें एडहॉक नियुक्तियों के माध्यम से भरा जाना चाहिए। यदि इन पदों को गेस्ट टीचर्स द्वारा भरे जाते हैं तो कॉलेज/संस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस तरह का कदम न केवल शिक्षकों के हित के खिलाफ होगा बल्कि शिक्षण मानकों से भी समझौता करेगा।
डॉ. सुमन ने बताया है कि ओबीसी कोटे से बढ़ी सेकेंड ट्रेंच (दूसरी किस्त) शिक्षकों की किन कॉलेजों में सीटों का इजाफा होगा। सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेंगी जाकिर हुसैन कॉलेज-42, दयाल सिंह कॉलेज-41, देशबंधु कॉलेज-40, रामजस कॉलेज-39, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज-39, लक्ष्मीबाई कॉलेज-39, गार्गी कॉलेज-38, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज-35, शिवाजी कॉलेज-34, श्यामा प्रसाद मुखर्जी-34, पीजीडीएवी-33, हंसराज कॉलेज-32, वेंकटेश्वर कॉलेज-32, मोतीलाल नेहरू कॉलेज-31, कालिंदी कॉलेज-31, मिरांडा हाउस कॉलेज-31, मैत्रीय कॉलेज-30, सत्यवती कॉलेज-30, श्री अरबिंदो कॉलेज-28, श्यामलाल कॉलेज-28, राजधानी कॉलेज-28 आदि कॉलेजों में। इनमें ओबीसी कोटे के पदों पर नियुक्ति होनी है। उन्होंने बताया है कि सेकेंड ट्रांच के अंतर्गत् 1282 पदों को भरा जाना है।
डॉ. सुमन ने डीयू के कार्यवाहक कुलपति से मांग की है कि 19 सितंबर 2019 (दो साल पहले) यूजीसी ने ओबीसी कोटे के पदों को भरने संबंधी जो सर्कुलर जारी कर ओबीसी कोटे के पदों को भरने के निर्देश जारी किए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन इस सर्कुलर को जल्द से जल्द लागू कराने के लिए कॉलेजों के प्राचार्यों को पदों को भरने के लिए रोस्टर तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन से पास कराकर पदों का विज्ञापन निकाले। साथ ही यह भी निर्देश जारी करे कि जो एडहॉक शिक्षकों के रूप में कार्य कर रहे हैं वे ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कारण उन्हें हटाया न जाए। साथ ही यह भी मांग की है कि प्राचार्य इन पदों के विज्ञापन जब तक स्थायी न निकाले तब तक एडहॉक शिक्षकों के रूप में नियुक्ति की जाए। यह भी सुनिश्चित करें कि इसी शैक्षिक सत्र -2021-22 में ओबीसी विस्तार की दूसरी किस्त के तहत दिए गए पदों को बिना देरी के जल्द ही स्थायी नियुक्ति के माध्यम से भरे जाए।

 

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