साहित्यिक मिशन को अन्य देशों में भी ले जाना चाहता हूं: डॉ. विजय पंडित

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तीन दिवसीय नेपाल-भारत साहित्य महोत्सव का आयोजन

पोखरा (नेपाल), 25 फरवरी। तीन दिवसीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव (22-24 फरवरी) का यहां सफलतापूर्वक आयोजन हुआ। आयोजक डॉ. विजय पंडित ने समापन समारोह के दिन मीडिया से रू-ब-रू होते हुए कहा कि कि हमने पहली बार वर्ष 2017 में मेरठ लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत थी। उसके बाद लगातार हम भारत में छह और नेपाल में पांच साहित्य महोत्सव आयोजित कर चुके हैं | डॉ विजय के अनुसार साहित्य समाज के दर्पण के साथ-साथ दीपक काम करता है, साहित्य समाज को सही राह पर चलने की दिशा दिखाता है | साहित्य के माध्यम से आपसी मेल-मिलाप बढ़ता है, साथ ही साहित्य का विस्तार होना, युवा पीढ़ी को जोड़ना महत्वपूर्ण है। इन्ही कुछ मुद्दों पर हम निरंतर प्रयास करते हुए कुछ योगदान दे पा रहे हैं | मैं प्राचीन भारतीय विचारधारा वसुधैव कुटुम्बकम् में विश्वास रखता हूँ जिसका अर्थ है “विश्व एक परिवार है”। जो सार्वभौमिक भाईचारे और एकता की भावना को बढ़ावा देता है। इस विचारधारा के अनुसार, पूरी दुनिया एक ही परिवार है और हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह हमें अपने पड़ोसियों और दुनिया भर के लोगों के प्रति दया और करुणा के साथ जोड़ता है | वैसे भी, मैं अपने प्रधानमंत्री की वैश्विक विचारधारा का अनुपासक रहा हूँ जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य (“One Earth, One Family, One Future”) यह जी-20 (G-20) का मंत्र भी है (Is the Mantra) । यही विचार और मूल्य लेकर (With the same Thoughts and Values) भारत (India) विश्व के कल्याण (Welfare of the World) का मार्ग प्रशस्त करेगा (Will Pave the Way) । मैं साहित्यिक मिशन को भारत-नेपाल के साथ-साथ अपने पडोसी देशों में ले जाने की योजना बना रहा हूँ | हिंदी-नेपाली के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेजी, रसियन, जापानी, फ्रेंच जैसी भाषाओं को भी आगामी साहित्य महोत्सव में भागीदारी को साकार रूप देने की तैयारी में जुटा हुआ हूँ |
भारतीय दूतावास काठमांडू, गंडकी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, पोखरा प्रज्ञा प्रतिष्ठान, ज्योतिष भविष्यवाणी मेडिया प्रा लि, लेखनाथ साहित्य प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में भारत की क्रांतिधरा साहित्य अकादमी द्वारा पोखरा, नेपाल के पृथ्वी नारायण कैंपस, गंडकी प्रज्ञा प्रतिष्ठान के भानुसभा हाल में आयोजित तीन दिवसीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के पंचम संस्करण का भव्य उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार सरूभक्त श्रेष्ठ, भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि सत्येन्द्र दहिया, गंडकी प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति सूर्य खड़का बिखर्ची, पोखरा प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति पद्मराज ढ़काल, बर्दघाट प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति डा घनश्याम न्यौपाने परिश्रमी, चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय मेरठ, भारत के इतिहास विभागाध्यक्ष और इतिहासकार प्रो. विघ्नेश कुमार, वरिष्ठ साहित्यकार व समाजसेवी गणेश प्रसाद लाठ मुख्य वक्ता रहे। सभी ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इससे पूर्व इसका शुभारंभ नेपाल व भारत के राष्ट्रीय गीत से किया गया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता नेपाल के वरिष्ठ भविष्य वक्ता व साहित्यकार डा बलराम उपाध्याय रेगमी ने की । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि नेपाल संगीत व नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान के पूर्व कुलपति वरिष्ठ साहित्यकार सरूभक्त श्रेष्ठ ने इस तरह के आयोजन से नेपाल भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक और धार्मिक संबंधों में मिठास आएगी, जोकि दोनों देशों के लेखकों व शोधार्थियों के लिए सेतु का काम करेगा। हमारे आपके बीच का दूरियां कम होगी। एक-दूसरे का साहित्यिक इतिहास जानने का बेहतर मंच है ये ।
विशिष्ट अतिथि इतिहासकार प्रो विघ्नेश कुमार ने कहा कि नेपाल भारत में इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होते रहने चाहिए। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक सम्बन्ध को हम अनदेखा नही कर सकते और भारत में 1857 की क्रांति और नेपाल की भूमिका सहित नेपाल भारत के ऐतिहासिक जानकारी सभी से साझा की ।
नेपाल भारत साहित्य महोत्सव आयोजक डा. विजय पंडित ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बर्दघाट प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति डॉ घनश्याम न्यौपाने परिश्रमी का भारत नेपाल के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक, साहित्यिक भाईचारा, मैत्री कायम रखने और देवनागरी लिपि पर केंद्रित उद्बोधन में कहा कि भारत की क्रांतिधरा साहित्य अकादमी द्वारा लेखनाथ साहित्य प्रतिष्ठान और ज्योतिष भविष्यवाणी साप्ताहिक के सहयोग से वसुद्धैव कुटुम्बकम् की भावना के साथ पोखरा में आयोजित किया जा रहा है जिसका उद्देश्य नेपाल और भारत के मध्य एक साहित्यिक सेतु का निर्माण करने के साथ परस्पर सहयोग, प्रेम, मैत्री, साहित्य का विस्तार, अनुवाद, शोध, विचारों का आदान प्रदान, युवाओं की भागीदारी से दोनों देशों के संबंधों को और भी प्रगाढ़ बनाना है ।

कार्यक्रम का संचालन पौडेल बिमुंश द्वारा नेपाली, हिन्दी दोनों भाषाओं में किया गया। नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के प्रथम संयोजक व वरिष्ठ साहित्यकार मुख्य वक्ता गणेश प्रसाद लाठ ने साहित्यिक महोत्सव में कृतियों के अनुवाद, प्रकाशकों व पाठकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उद्घाटन समारोह में ‘नेपाल भारत साहित्य महोत्सव’ की स्मारिका का विमोचन किया गया। लघुकथा सत्र में भारत से विभारानी श्रीवास्तव, रवि श्रीवास्तव, अमृता सिन्हा, नीता चौधरी, ऋचा वर्मा, डा ममता पंत, मीरा प्रकाश, सीमा रानी, कृष्ण कुमार ‘आशु’, अनिता निधि नेपाल से लघुकथाकार भाषा आयोग के सदस्य डा पुष्कर राज भट्ट, कल्याण पंत, श्याम श्रेष्ठ और किशन पौडेल शामिल रहे | लघुकथा सत्र में किशन पौडेल की हिन्दी में प्रकाशित लघुकथा पुस्तक अंतर्दृष्टि का भव्य विमोचन किया गया और चर्चा की गई। कहानी सत्र में महाराष्ट्र से विपिन पंवार और डॉ हरेंद्र हर्ष शामिल रहे।

प्रथम दिन का समापन ग़ज़ल और बहुभाषी कविता के नाम रहा, सत्र संचालन डा देवी पंथी ने किया, कादंबिनी नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कविता, गीत, गज़ल को समर्पित इस में 77 नेपाली व भारतीय कलमकारों ने शिरकत की। नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन के उद्घाटन सत्र में नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार माधव वियोगी रहे और दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। द्वितीय दिवस का प्रथम सत्र शोध-पत्र (कार्यपत्र) का रहा जिसमें पर्यटन साहित्य: एक विमर्श लेखक ऋषभ देव घिमिरे ने प्रस्तुत किया। दूसरा कार्यपत्र साहित्यिक व कला क्षेत्र में प्रतिलिपि का अधिकार विशु कुमार के. सी ने प्रस्तुत किया। तृतीय कार्यपत्र भारतीय साहित्य का नेपाल संबंध विषय पर भारत के कमल किशोर वर्मा कमल ने प्रस्तुत किया। भारत से डा घरो चौधरी ने ‘महान स्वप्नदर्शी का यात्रा दर्शन’ विषय पर रहा। डा ममता पंत ने ‘कुमाऊंनी लोकगीतों में स्त्री वेदना’ विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी की हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो उर्वशी गहलौत नेपाली व भारतीय साहित्य में नारी हस्ताक्षर विषय पर शोध-पत्र व परिचर्चा में शामिल रहीं। दूसरे सत्र में हिन्दी, नेपाली, अंग्रेजी भाषाओं की अनेक पुस्तकों का विमोचन हुआ साथ ही कवि सम्मेलन, मुशायरा व सम्मान समारोह आयोजित किया गया | भारत से अभिराम पाठक, अर्जुन सिंह चांद, सत्य प्रकाश सत्य, सुरेश सोनपुरे, डा हरेंद्र हर्ष, शकुन त्रिवेदी, रंजीता जोशी, श्वेता मौर्या, डा उर्वशी गहलौत, गोपीचंद चौरसिया, डा त्रिलोक चंद फतेहपुरी, राव शिवराज सिंह, पूनम कतरियार, सुनील कुमार, मौत नसीम अख्तर, संगीता वर्मा, डा गोकुल बहादुर क्षत्रिय, डा संदेश त्यागी, डा अरूण शैहरीया ताईर, प्रो नवजोत भनोत, एडवोकेट समर बहादुर, गार्गी राम, पूनम देवा, संगीता गोविल, डा मीना कुमारी परिहार, सीमा वर्णिका, अनुपमा सिंह, इंद्रजीत चक्रवर्ती, अरविंद तिवारी, ममता कर्ण, ललित लोहार, विष्णु भंडारी, शिव शंकर हजारिका, पदुम हजारिका, विजय बरा, हेमप्रभा हजारिका, माधव ज्योति देऊरी, राजेंद्र प्रसाद, नीता चौधरी, अरविंद यादव, मनीष शुक्ला और शीतल राघव देवयानी भी उपस्थित थीं।
तृतीय दिवस समापन समारोह में मुख्य अतिथि नेपाली लोक-संस्कृति के विद्वान व नेपाली भाषा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रा डा कुसुमाकर न्यौपाने, प्रो एस. एस. डोगरा, प्रा शिव त्रिपाठी, असफल गौतम, दुर्गा शाह बाबा, सरिता तिम्मलसिना पंगेनी, वरिष्ठ पत्रकार मनीष शुक्ला, कोमल प्रसाद राठौर, अंतरराष्ट्रीय नेपाली साहित्य समाज नेपाल चैप्टर के अध्यक्ष राजेंद्र के.सी, प्रा डा षणानंद पौडयाल, साहित्यकार ऋषभ देव घिमिरे, अनुवादक राजेंद्र गुरागांई रहे | भारत की राजधानी से विशेषरूप से आमंत्रित लेखक-पत्रकार-मीडिया शिक्षाविद-फ़िल्मकार प्रो.एस.एस. डोगरा की अंग्रेजी में लिखी पांचवीं पुस्तक “वाओव” (WOW ‘words of wisdom’ ) का विमोचन पोखरा प्रज्ञा- प्रतिष्ठान के कुलपति पद्मराज ढकाल की अध्यक्षता में किया गया। गौरतलब है कि प्रो. डोगरा ने मीडिया जगत में अपनी लेखनी से देश-विदेशों में विशेष मुकाम हासिल किया है। साथ ही लेखन क्षेत्र में भी, मीडिया कैन डू वंडर्स इन स्टूडेंट्स लाईफ, मीडिया एक कदम आगे, मेरे हमसफ़र, रांडेव्यू (इन एंड ऑफ द फील्ड्स) जैसी चार किताबें लिखने के बाद उनकी पांचवीं पुस्तक “वाओव” में अपने जीवन-अनुभवों पर आधारित व्यवाहारिक-प्रेरक विचारों को परोसा है। पुस्तक, विशेषतौर पर युवा पीढ़ी को सफल जीवन बनाने में बेहद उपयोगी साबित होगी।
तीन दिवसीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में तृतीय दिवस में पृथ्वी नारायण कैंपस के कानून विभाग और आईटी विभाग के एक सौ छात्र छात्राओं की विशेष भूमिका रही, युवा संसद का आयोजन किया गया जिसमें सभी युवाओं ने हिन्दी नेपाली अंग्रेजी भाषाओं में अपने विचार, कविता व संस्मरण रखे। सभी ने नेपाल भारत संबंधों को और भी प्रगाढ़ बनाए रखने के लिए अपना सहयोग करने का संकल्प लिया। समापन समारोह में तीनों दिन का अनेक भाषाओं में सफल संचालन करने के लिए पौडेल विमुंश को ‘बैस्ट ऐंकरिंग अवार्ड’ विशेष प्रदान किया गया। कंप्यूटर साइंस और आईटी छात्रा लक्ष्मी शर्मा ने आयोजन की मंच व्यवस्था में उत्कृष्ट भूमिका निभाई। नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के नेपाल संयोजक प्रा डा बलराम उपाध्याय रेगमी ने सभी अतिथियों व संयुक्त तत्वावधान में आयोजित करने वाले सभी सहयोगियों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए पोखरा घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि आगामी वर्ष मे आयोजित महोत्सव को और भी बेहतर व सुव्यवस्थित बनाएंगे । नेपाली व कुमाऊंनी लोकगीत के साथ तीन दिवसीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव संपन्न हुआ। सभी ने नेपाल भारत साहित्य महोत्सव को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया।

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