खुद तय करें, चारधाम दर्शन करने हैं या बैकुंठ धाम के

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  • छह माह चलेगी चारधाम यात्रा, सब एक साथ न आएं
  • ये सरकार महाझूठी है, इंतजाम जीरो हैं, अपने रिस्क पर ही आएं

एक सप्ताह पहले चारधाम यात्रा शुरू हुई। अब तक हार्टअटैक और सांस की समस्या से 20 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। चारोंधामों में हजारों लोग उमड़ रहे हैं जो कि वहां की क्षमता से कई गुणा अधिक है। वहां रहने-खाने की किल्लत है। शौचालय की भी। सबसे बड़ी बात, मैदान के सभी लोगों को जल्दी है। चार-पांच दिन में ही कम से कम दो धाम देख लेना चाहते हैं।
दिल्ली एनसीआर में तापमान 42 डिग्री से अधिक है। दिल्ली समुद्रतट से 100 फुट भी ऊपर नहीं, वहां से आया तीर्थयात्री अचानक ही दस या 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचता है तो उसे तापमान महज 2 डिग्री मिलता है। ऊपर से बेहिसाब ऊंचाई। युवाओं की बाड़ी तो एडजस्ट कर भी ले, लेकिन बुजुर्ग अपने को वातावरण के अनुकूल नहीं ढाल पाते। उधर, बेटे की चिन्ता है कि चार-पांच दिन में ही तीर्थयात्रा पूरी करा कर दिल्ली लौटना है। यानी वक्त की कमी।
ऐसे में वह मां-बाप को घसीटता हुआ बदरीनाथ-केदारनाथ या गंगोत्री-यमुनोत्री धाम ले जा रहा है। ऐसे में बुजुर्गों का शरीर हिमालय के अनुकूल नहीं होता। ऊंचाई बढ़ने पर आक्सीजन कम होती है तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। सरकारी इंतजाम जीरो हैं। डाक्टर नहीं तो इलाज भी नहीं। कहीं-कहीं हैं भी पता चलता है कि दवाएं नहीं। ऐसे में उनकी तबीयत बिगड़ने की अधिक आशंका रहती है। आखिर ऐसी तीर्थयात्रा का क्या लाभ? जब मानसिक सुकून ही न मिले? उल्टे बुजुर्गों की जान चली जाए।
पर्वतारोही भी कुछ दिन बेस कैंप में इंतजार करते हैं। कैंप वन तक जाते हैं फिर लौट आते हैं। फिर दूसरे दिन दोबारा जाते हैं। मैदानों से तीर्थयात्री सोनप्रयाग से अचानक ही या चापर से 11 हजार फीट से अधिक केदारनाथ धाम पहुंचेंगे तो आक्सीजन और सांस की समस्या तो आएगी ही?
धाम में हजारों लोग पहुंच रहे हैं। वहां सरकारी इंतजाम न के बराबर हैं। जानकारी के अनुसार हेल्थ डिपार्टमेंट के पास एक ही कार्डिक वैन है। सरकार दावा करती है कि सारे इंतजाम हैं। लेकिन इंतजाम जीरो हैं। इसलिए मीडिया में चारधाम के विज्ञापन भी जारी नहीं किए जा रहे हैं कि अनहोनी हो गयी तो सरकार पर दोष लगेगा। तीर्थयात्रियों की सीमित संख्या करने से हिन्दू वोट बैंक पर असर पड़ेगा। सीएम धामी को किसी भी हाल में उपचुनाव जीतना है।
इसलिए मेरा कहना है कि थोड़ा सब्र कर लो। चारधाम यात्रा पूरे छह महीने चलेगी। कल खत्म नहीं होने जा रही है। धामों में बेहिसाब भीड़ मत करिए। धाम में दर्शन करने हैं या बैकुंठ धाम जाना है। आप खुद ही तय करें। सरकार के भरोसे बिल्कुल न रहे।
[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

 

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