लव जिहाद का शिकार हो गयी बाघिन!

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  • टाइगर रिजर्व का मनी सेविंग अभियान विफल, बैटरी का खर्च बचाना महंगा पड़ा
  • लोकलाज के कारण वार्डन ने नहीं ली पुलिस की मदद, अब इश्तहार ही सहारा

एक ओर साहेब ने नामीबिया से आए 8 चीतों के लिए 100 करोड़ फूंक दिये, इधर, उत्तराखंड के वन्य जीव विभाग 50 रुपये की रेडियो कालर बैटरी का खर्च नहीं निकाल पाए। इस कंजूसी का परिणाम निकला कि बाघिन भाग गयी। आशंका जतायी जा रही है कि लव जिहाद का शिकार हो गयी। वो बेचारी भोली और मासूम होने के साथ ही साथ अकेली थी। उसकी सहेलियां कार्बेट में हैं और उसे पकड़कर राजाजी ले आए थे। तब भी बेचारी कुछ नहीं बोली। विरोध नहीं किया। बाघिन भागने से राजाजी टाइगर रिजर्व के वार्डन लोकलाज के कारण पुलिस के पास भी नहीं गये। और अब गुमशुदा बाघिन की चिन्ता में दोहरे हुए जा रहे हैं।
वार्डन साहब को लगता है कि बाघिन यूपी की ओर भागी होगी। खोज में टीमें लगाई गयी हैं। यूपी में जब से योगी सरकार आई है तो वहां लव-जिहाद तो क्या प्यार करना और जताना दोनों मुश्किल है जबकि उत्तराखंड में नेताओं और अफसरों के प्यार के किस्सों की मिसाल दी जाती है। ऐसे में कोई प्यार का मारा, आवारा बाघ आया और सावन के महीने में बाघिन को भगा ले गया। बेचारी मासूम थी। नहीं समझी होगी उसकी चाल। प्यार होता ही अंधा है, नहीं देखा और भाग गयी यूपी की ओर। अरे भई, पता करो जरा, सैफई तो नहीं गयी होगी क्या? मुजफ्फरनगर तो कतई नहीं जाएगी, दंगों के बाद वहां हालात खराब ही हैं।
इधर, वार्डन साहेब का मनी सेविंग अभियान विफल हो गया। जो रेडियो कॉलर की बैटरी न लगाने से बचाए रुपये तिजोरी में रखे थे, उनमें से अधिकांश बाघिन को तलाशने में खर्च हो गये। अब टाइगर रिजर्व का स्टाफ बचे हुए पैसे लेकर मीडिया के दरवाजों पर जा रहे हैं कि गुमशुदा की तलाश का विज्ञापन लगा दो।
‘लौट आओ बाघिन, तुम्हारे जाने से टाइगर रिजर्व सूना हो गया। बाघ तो बाघ, वार्डन बेहद दुखी हैं। वार्डन का वजन लगातार गिर रहा है। कमजोरी होने से चक्कर आ रहे हैं। प्लीज, ये खबर पढ़ते ही तुरंत लौट आओ।‘
निवेदक: समस्त स्टाफ, राजाजी टाइगर रिजर्व।
[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

बेटियां तो ऐसी ही होती हैं, छोटी=सी उम्र में बहुत बड़ी हो गयी ‘रिमझिम‘

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