गुडि़या दुष्कर्म व हत्या मामलाः दोषी नीलू को ताउम्रकैद और 10 हजार का जुर्माना

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शिमला, 18 जून। हिमाचल प्रदेश की अदालत ने बहुचर्चित गुडि़या दुष्कर्म और हत्या मामले में आज दोषी को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर एक साल की अतिरिक्त सजा और काटनी होगी। इस बीच, नीलू ने आरोप लगाया कि उसे सीबीआई ने उसे झूठे मामले में फंसाया है और वह इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगा। नीलू को कड़ी सुरक्षा में विशेष अदालत में लाया गया था।
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर चक्कर में सत्र एवं जिला न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की विशेष अदालत ने गुडिया मामले की जांच कर रही सीबीआई की चार्जशीट के तथ्यों को आधार माना। अदालत ने आज दोपहर 2 बजे इन्हीं तथ्यों के आधार पर अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश (28) को गुडिया से दुष्कर्म के अपराध में मरते दम तक कारावास की सजा और हत्या के मामले में उम्रकैद समेत 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने की सूरत में नीलू को एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। अदालत का फैसला सुनने के बाद नीलू के चेहरे की हवाईयां उड़ गई।
इस बीच, नीलू के वकील ने कहा कि वे इस फैसले को उच्च न्यायलय में चुनौती देंगे। वकील ने कहा कि नीलू को सिर्फ परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार सजा सुनाई गई है। जबकि जांच एजेंसी ने मौका-ए-वारदात पर नीलू की मौजूदगी को लेकर कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए।
मालूम हो कि शिमला जिले के कोटखाई की दसवीं की एक छात्रा 4 जुलाई 2017 को स्कूल से लौटते हुए लापता हो गई थी। इसके बाद 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में छात्रा की निर्वस़्त्र अवस्था में लाश मिली थी। छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी।
अदालत में इस मामले की सुनवाई 29 मई, 2018 को शुरू हुई थी। सीबीआई ने 13 अप्रैल को नीलू को हाटकोटी शिमला में गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने उसी साल 29 मई को अदालत में चार्जशीट दायर की थी। सीबीआई ने इस मामले में 55 गवाह पेश किए थे। वहीं, नीलू की तरफ से सिर्फ एक गवाह पेश हुआ था। अदालत ने इस मामले में परिस्थितिजनक साक्ष्यों को आधार फैसला सुनाया है। सीबीआई ने नीलू को डीएनए सैंपलिंग के आधार पर गिरफ्तार किया था।

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