राज्य आंदोलन में राजेंद्र शाह की अहम भूमिका

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  • शाह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऐसा कुछ भी नहीं किया कि कांग्रेस शर्मसार हो

रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। दस साल के लिए सत्ता से दूर हो गयी कांग्रेस को अब भी सबक नहीं मिल रहा। कांग्रेस की बदकिस्मती है कि वह अपनों की कद्र नहीं करती। आपस में लड़-मर जाते हैं। ऐसा ही इन दिनों हो रहा है। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा को मैं पहले ही कुपोषित घोषित कर चुका हूं। उन्हें न तो राजनीति आती है और न ही सबको साथ लेकर चलने की कुव्वत है। उन्होंने एक विवादित बयान दिया और फिर माफी मांगी।
इस बीच कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा दिल्ली में जंतर-मंतर पर राजेंद्र शाह के काले कारनामे उजागर करने की बात कही जा रही है। मैं गवाह हूं दिल्ली के जंतर-मंतर का। राजेंद्र शाह ने वहां ऐसा कुछ भी ऐसा नहीं किया कि कांग्रेस को शर्मसार होना पड़े, पर कांग्रेस ने उत्तराखंड में ऐसे बहुत से कारनामे किये हैं कि जिससे जनता ने उन्हें सत्ता से नकार दिया। राजेंद्र शाह ने समर्पित भाव से राज्य आंदोलन में शिरकत की और राज्य निर्माण आंदोलन में उनकी भूमिका को बिल्कुल भी कमतर नहीं आंका जा सकता। मैंने देखा है उन्हें सर्दी, गरमी बरसात में जंतर-मंतर धरना स्थल पर डटे हुए। एक योद्धा के तौर पर। हालांकि एक कांग्रेसी नेता के तौर पर मैं उनकी गारंटी नहीं लेता।
[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

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