डीयूः बराबर अंक होने पर आरक्षित छात्रों को मिले सामान्य श्रेणी से एडमिशन

306

ओबीसी कोटे में जाति प्रमाण पत्र में तीन साल की छूट देने की मांग
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर। आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) के अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर पी.सी. जोशी को पत्र लिखकर मांग की है कि डीयू कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने एससी/एसटी और ओबीसी कोटे के छात्रों को सामान्य वर्गों के छात्रों के बराबर अंक (मार्क्स) होने पर उन्हें सामान्य श्रेणी में एडमिशन दिया जाए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी नई गाइडलाइंस में जिस श्रेणी में छात्रों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया है उन्हें उसी श्रेणी में कॉलेज एडमिशन देगा।
डीटीए अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रवेश शाखा ने शैक्षणिक सत्र 2021-2022 में प्रवेश से संबंधित शिकायतों को कम करने के लिए अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस दिशानिर्देश के बिंदु नं. 14 के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में श्रेणी परिवर्तन की अनुमति नहीं है। यह बिंदु भारत के संविधान में प्रदत्त शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के प्रावधानों के विपरीत है। यह बिंदु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न निर्णयों के विरुद्ध भी है। अनारक्षित श्रेणी सामान्य उम्मीदवारों को दिया गया कोई आरक्षण नहीं है और किसी भी श्रेणी का कोई भी उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी में प्रवेश के लिए पात्र है, यदि उसके पास अनारक्षित श्रेणी के लिए योग्यता आधारित अंक (मार्क्स) हैं, भले ही उसने अनारक्षित के अलावा किसी अन्य श्रेणी से आवेदन किया हो।
डॉ. सुमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के अलावा डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर को भी इस संदर्भ में याद दिलाया है कि गत वर्षों की भांति एससी/एसटी/ओबीसी के छात्रों को सामान्य श्रेणी के छात्रों के बराबर अंक (मार्क्स) होने पर उन्हें सामान्य श्रेणी में एडमिशन दिया जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रवेश शाखा से अनुरोध और अपेक्षा की जाती है कि केंद्र के नियमों और नीतियों के अनुसार इस खंड की अपनी अतिरिक्त गाइडलाइंस में संशोधन करें, क्योंकि उसमें यह स्पष्ट नहीं कि एससी/एसटी/ओबीसी के छात्रों को सामान्य श्रेणी में प्रवेश दिया जाए, यदि उनकी कट ऑफ सामान्य के बराबर है। उन्होंने पुनः डीयू गाइडलाइंस में संशोधन किए जाने की मांग की है।
डॉ. सुमन ने यह भी बताया कि ओबीसी कोटे के छात्रों का स्नातक पाठ्यक्रमों में एडमिशन के समय 31 मार्च 2021 के बाद बने ओबीसी कोटे के जाति प्रमाण पत्रों को ही स्वीकार किया जा रहा है, यदि उनके पास 31 मार्च 2021 के बाद का जाति प्रमाण पत्र नहीं है तो उन छात्रों से कॉलेज अंडरटेकिंग ले रहा है। उन्होंने कुलपति को लिखें पत्र में ओबीसी के छात्रों के जाति प्रमाण पत्रों को तीन साल तक की छूट दिए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के कारण जाति प्रमाण पत्रों की फिजिकल जांच नहीं हो पाई और बहुत से छात्र आवेदन नहीं कर पाए। इसलिए उन्हें छूट दी जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित करेगी

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here