कोदा-झंगोरा की रोटी बनाम मिस्सी रोटी

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  • हरदा का जैविक अन्न प्रेम अब बुढ़ापे में आ रहा काम
  • दो सरदारों के झगड़े में ले लिया पंगा, अब करो मुकाबला

अपने हरदा का पहाड़ प्रेम निराला है। हर सीजन में वो अलग-अलग उत्पादों की पार्टी देते हैं। इस सीजन में ककड़ी, मुंगरी पार्टी का आयोजन होना था, लेकिन फंस गये बेचारे। दो सरदारों के झगड़े में पिस गये। इधर, मुंगरी और ककड़ी हरदा-हरदा पुकार रही है कि आओ-आओ हरदा, मुझे खाओ-मुझे खाओ। बेचारे हरदा, तरस गये मीठी-मीठी जैविक मुंगरी और हरी-हरी ककड़ी खाने के लिए। चुफाल ने तो नून भी पीसा था उनके लिए। ये मुई राजनीति है ही ऐसी कि न खाने का, न सोने का टाइम।
हरदा, उम्र के इस पड़ाव में समय से सोना-खाना जरूरी है। खाना एनर्जी के लिए सोना दलित नेता को सीएम बनते सपने देखने के लिए। हरदा के सपने भाजपाइयों को डरा देते हैं। हरदा पंजाब में चन्नी की ताजपोशी कर आए तो भावुक हो गये और कहने लगे कि वो उत्तराखंड का सीएम दलित को देखना चाहते हैं। उनके इस सपने ने युवा सीएम धामी की नींद खराब कर दी। सीएम धामी दौड़े-दौड़े सुबह-सुबह यशपाल आर्य के घर जा पहुंचे। जबरदस्ती नाश्ता भी वहीं किया। आर्य की समझ में नहीं आया कि हरदा के सपने का उनसे क्या संबंध? लेकिन राजनीति जानने वाले जानते हैं कि कमजोर कड़ी कौन? जो बेटे को विधायकी की सीट के लिए कांग्रेस के दशकों तक दिये सम्मान को मिनट में भूल सकता है वो सीएम के लिए भाजपा को कई बार छोड़ सकता है।
खैर, हरदा कैप्टन और ओपनर के बीच फंस गये। चन्नी के टाइम भी पूरी रात काली हुई थी। अब फिर वही कयामत की रात। जुलाई से लेकर अब तक चैन की नींद नहीं सोए हरदा। इधर, उत्तराखंड में प्रीतम और उनका गुट पहले से ही हरदा की नींद हराम किये हैं। गोरे मुखड़े वाले प्रीतम ने मीडिया से यूं क्या पूछ लिया कि क्या उनका चेहरा सीएम लायक नहीं है? बस, हरदा के निकटस्थ बताते हैं कि उस दिन से वह रातों को कई बार उठ जाते हैं और देर तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। यानी अब डबल खतरा। पंजाब में फेल हरदा कैसे उत्तराखंड में जीत का चेहरा होंगे? लेकिन सच तो यह है हरदा ने जो कोदा की रोटी और झंगोरे की खीर खाई है, उसमें दम है। पंजाब की मिस्सी रोटी पर चुपड़े मख्खन की तुलना में कोदी की रोटी और बदरी गाय का घी अब काम आ रहा है। देखा, कोदा-झंगोरे का कमाल। मिस्सी रोटी खाने वाले दो-दो सरदारों से कोदा-झंगोरा खाने वाला अकेला जूझ रहा। कोई और होता तो तेल निकल गया होता।
#कोदा-झंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड को आगे ले जाएंगे।
[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

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